महाराष्ट्र की राजनीति में आया नया मोड़: शिंदे और राज ठाकरे आए साथ, क्या उद्धव-राज की जोड़ी में पड़ गई है दरार?

 महाराष्ट्र की राजनीति में आया नया मोड़: शिंदे और राज ठाकरे आए साथ, क्या उद्धव-राज की जोड़ी में पड़ गई हैं दरार?




मुंबई/कल्याण

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर से समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। हाल ही में संपन्न हुए नगर निकाय चुनावों के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में एक ऐसी हलचल मची है, जिसने महायुति और महाविकास अघाड़ी (MVA) दोनों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) में एकनाथ शिंदे की शिवसेना और राज ठाकरे की मनसे (MNS) के बीच हुआ गठबंधन इस समय सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है।

अभी पता नहीं ये चर्चा कहा तक चलेगी इस पर बहुत विवाद चल रहा है आगे क्या होगा समझ नहीं आ रहा..?

कल्याण-डोंबिवली में शिंदे सेना और MNS का गठबंधन

कल्याण-डोंबिवली नगर निगम के चुनाव परिणामों में शिंदे की शिवसेना 53 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं उनकी सहयोगी बीजेपी को 50 सीटें मिली हैं। बहुमत के लिए 62 सीटों की आवश्यकता है। ऐसे में शिंदे सेना ने बीजेपी पर अपनी निर्भरता कम करने और स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए राज ठाकरे की मनसे के 5 पार्षदों का समर्थन हासिल कर लिया है। इस गठबंधन के बाद मुंबई राजनीति में बहुत चर्चा चल रही है बहुत विमुख मोड में है 

उद्धव-राज के गठबंधन को लगा झटका?

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मुंबई (BMC) और अन्य निगमों के चुनावों के लिए करीब 20 साल पुरानी दुश्मनी भुलाकर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक साथ आए थे। "मराठी मानुस" के मुद्दे पर दोनों भाई एक ही मंच पर नजर आए थे। लेकिन चुनाव खत्म होते ही कल्याण में मनसे का शिंदे गुट (जो कि उद्धव का धुर विरोधी है) को समर्थन देना, ठाकरे भाइयों के गठबंधन पर सवालिया निशान खड़े कर रहा है। ये बहुत चिंता का सबक बना हुआ है 

हालांकि, राज ठाकरे ने इसे "स्थानीय स्तर का फैसला" बताया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शिंदे ने राज ठाकरे को अपने पाले में खींचकर उद्धव ठाकरे को एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका दिया है।

बीजेपी को 'साइड लाइन' करने की रणनीति?

जानकारों का मानना है कि शिंदे सेना द्वारा मनसे को साथ लेना केवल बहुमत का जुगाड़ नहीं है, बल्कि बीजेपी को यह संदेश देना भी है कि वे क्षेत्रीय स्तर पर अन्य विकल्पों के साथ आगे बढ़ सकते हैं। बीजेपी और शिंदे सेना के बीच मेयर पद और सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही खींचतान के बीच यह कदम काफी अहम माना जा रहा है।

आगे क्या होगा?

23 जनवरी 2026 को बालासाहेब ठाकरे की जयंती के मौके पर उद्धव और राज ठाकरे एक साथ नजर आए थे, जहाँ उन्होंने मराठी अस्मिता की लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया था। लेकिन कल्याण के इस घटनाक्रम ने उद्धव खेमे में नाराजगी पैदा कर दी है। संजय राउत ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे "अस्वीकार्य" बताया है।

ग्राफिक्स/टेबल: 

KDMC की सीटों का गणित 

(शिंदे: 53,

 बीजेपी: 50,

 UBT: 11,

 MNS: 5

पुराना संदर्भ: 2022 में शिवसेना की पार्टी काफी मजबूत थी परन्तु अभी कुछ बोल नहीं सकते ।

सोशल मीडिया रिएक्शन: ट्विटर पर लोग इस गठबंधन को 'गद्दारी' कह रहे हैं या 'मास्टरस्ट्रोक', इस पर सोशल मीडिया पर बवाल बना हुआ है सब लोग अपनी राय दे रहे हैं 


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