UP में 'महा-विद्रोह': UGC एक्ट के खिलाफ बीजेपी में मची भगदड़, इस्तीफों की सुनामी!😱

UP में 'महा-विद्रोह': UGC एक्ट के खिलाफ बीजेपी में मची भगदड़,  इस्तीफों की सुनामी!😱




रायबरेली/नोएडा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस वक्त एक बड़ा "भूकंप" आया हुआ है। केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए UGC रेगुलेशन 2026 की आग अब बीजेपी के अपने ही घर तक पहुँच गई है। रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा से बीजेपी किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष श्याम सुंदर त्रिपाठी ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पद से इस्तीफा दे दिया है। त्रिपाठी ने इस कानून को सवर्णों के खिलाफ एक "साजिश" और "काला कानून" करार दिया है। ओर इसका लोग बहुत विरोध कर रहे हैं और इसी कारण bjp के कुछ नेता इस्तीपे की बात कह रहे हैं क्योंकि वो जनता को नाराज नहीं कर सकते क्योंकि 5 साल बाद चुनाव आते हैं 


ये खबर भी पढ़े 👉 https://liveupdate24india.blogspot.com/2026/01/blog-post_28.html

इस्तीफे में लिखा- "यह आत्मसम्मान की लड़ाई है"

श्याम सुंदर त्रिपाठी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे अपने पत्र में बेहद तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने लिखा, "सवर्णों के बच्चों के खिलाफ लाए गए इस काले कानून और आरक्षण बिल से मैं पूरी तरह असंतुष्ट हूँ। यह कानून समाज को बांटने वाला और बेहद खतरनाक है। ऐसे अनैतिक बिल का समर्थन करना मेरे आत्मसम्मान और विचारधारा के खिलाफ है"। माननीय प्रधानमंत्री जी को भी बहुत से नेता पत्र लिख रहे हैं और बात चित हो रही हैं इस पर पर सरकार का कोई रुख सामने नहीं आया है क्या होता है आगे..

रायबरेली से नोएडा तक 'इस्तीफा पॉलिटिक्स'

सिर्फ रायबरेली ही नहीं, पश्चिमी यूपी के नोएडा में भी बीजेपी युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष राजू पंडित ने इसी कानून के विरोध में अपना पद त्याग दिया है। इस्तीफों की यह कड़ी बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री से शुरू हुई थी, जिन्होंने इस एक्ट को "ब्राह्मण विरोधी" बताते हुए इस्तीफा दिया था। यूपी के अलग-अलग जिलों से अब तक करीब एक दर्जन से ज्यादा छोटे-बड़े बीजेपी पदाधिकारी अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं। रायबरेली से ले कर नोएडा तक bjp दफ्तरों में इस्तेपे देने की होड़ सी मच गई है कि कई नेता इसका भरपूर विरोध कर रहे हैं जबकि बहुत से नेताओं ने इस पर चुप्पी बनाई हुई है 

क्या है इस 'सनसनी' की असली वजह?

UGC (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन) ने 13 जनवरी 2026 को नए नियम जारी किए हैं। विवाद की मुख्य जड़ें नीचे दिए गए पॉइंट्स में हैं:


ये खबर भी पढ़े 👉 https://liveupdate24india.blogspot.com/2026/01/5.html

एकतरफा परिभाषा: 

नए नियमों (Regulation 3c) के तहत 'जातिगत भेदभाव' की परिभाषा को केवल SC, ST और OBC तक सीमित कर दिया गया है। सवर्णों का आरोप है कि अगर उनके साथ भेदभाव होता है, तो वे शिकायत भी नहीं कर पाएंगे।

Equity Squads का डर:

कॉलेजों में बनने वाले 'इक्विटी स्क्वॉड्स' को अत्यधिक शक्तियां दी गई हैं, जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों को "निगरानी" में रहने का डर सता रहा है।

दोषी मान लेने की प्रवृत्ति: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह कानून सवर्ण छात्रों और शिक्षकों को "डिफ़ॉल्ट अपराधी" की तरह देखता है। ऐसे बहुत प्वाइंट है जिसको ले कर जनता सरकार पर निशान शाद रही हैं 

सरकार की सफाई और विपक्ष का रुख

चौतरफा घिरने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वे स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। वहीं यूपी के सवर्ण संगठनों (करणी सेना, ब्राह्मण सभा) ने चेतावनी दी है कि अगर यह "काला कानून" वापस नहीं लिया गया, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। इस पर सरकार ने सफाई भी दी है सरकार का कहना है सबका साथ सबका विकास को लेकर एक मुहिम है सरकार बहुत बोल रही है 


The "Bangles" Protest: 

खबर में यह जरूर जोड़ें कि रायबरेली के बीजेपी नेताओं ने विरोध स्वरूप अपने ही सवर्ण सांसदों और विधायकों को "चूड़ियाँ" भेजी हैं। कई जगह ऐसी खबर भी निकल कर आ रही है इसका बहुत विरोध कर रहे हैं लोगो ने नेताओं को चूड़ियां भेजी है पुतले तक जलाने की खबर आई है 

Legal Action: 

सुप्रीम कोर्ट में इस कानून के खिलाफ दाखिल हुई जनहित याचिका (PIL) सुप्रीम कोर्ट ने इसकी मंजूरी दे दी है सुप्रीम कोर्ट के मंजरी के बाद इसका विरोध चरम सीमा पर पहुंच गया है 


ये खबर विभिन्न तथ्यों पर आधारित है इसकी पुष्टि हम नहीं कर सकते...


ऐसी ही खबर देखने के लिए हमारे सोशल मीडिया अकाउंट को फॉलो सबक्राइब करे।।


टिप्पणियाँ