योगी सरकार बनाम इलाहाबाद हाईकोर्ट: "क्या अपराधी पुलिस पर गोली चलाएं और हम चुप रहें?" एनकाउंटर विवाद पर सीएम योगी का पलटवार
योगी सरकार बनाम इलाहाबाद हाईकोर्ट: "क्या अपराधी पुलिस पर गोली चलाएं और हम चुप रहें?" एनकाउंटर विवाद पर सीएम योगी का पलटवार
उत्तर प्रदेश
में अपराधियों के खिलाफ जारी 'जीरो टॉलरेंस' मुहिम और पुलिस मुठभेड़ों (Encounters) को लेकर राज्य सरकार और न्यायपालिका के बीच एक वैचारिक टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर की गई तल्ख टिप्पणियों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपना पक्ष रखा है।
और कहा आए दिन अपराधियों द्वारा पुलिस पर गोलियां चलाई जाती हैं और कई पुलिस वाले जान गवां देते हैं और उनके परिवार वाले अपना बेटा खो देते हैं ऐसे में उनके हाथ baadhna कितना सही है ऐसे में कोर्ट का ऐसा रुख गलत है
इलाहाबाद हाईकोर्ट की गंभीर चिंताएँ
विवाद की शुरुआत तब हुई जब इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने यूपी में बढ़ते 'हाफ एनकाउंटर्स' (अपराधी के पैर में गोली मारना) पर सवाल उठाए। जस्टिस अरुण कुमार देशवाल की बेंच ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा, "ऐसा लगता है जैसे राज्य में पुलिस ही जज और जल्लाद बन गई है। सजा देना अदालत का काम है, पुलिस का नहीं।" अदालत ने आशंका जताई कि क्या उत्तर प्रदेश एक 'पुलिस स्टेट' में तब्दील हो रहा है? कोर्ट ने यह भी कहा कि कई मामलों में पुलिस केवल पदोन्नति (Promotion) और पुरस्कार पाने के लिए मुठभेड़ की कहानियाँ बुनती है, जो मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट को कहते हुए योगी जी ने कहा एनकाउंटर होता हैं और जब अपराधी मर जाता हैं तो सवाल उठता है ये गलत है ऐसे में कोर्ट द्वारा इस बे बुनिवादी सवाल पूछना गलत है
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का करारा जवाब
कोर्ट की इन टिप्पणियों और विपक्षी दलों के आरोपों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार की नीति का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने सार्वजनिक मंच से सवाल किया, "अगर कोई दुर्दांत अपराधी पुलिस टीम पर गोली चलाता है, तो क्या हमारे जवान हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें? क्या वे अपनी जान जोखिम में डालकर अपराधियों की गोली खाएं?"
सीएम योगी ने साफ किया कि पुलिस की कार्रवाई केवल आत्मरक्षा (Self-Defense) में होती है। उन्होंने कहा कि जो अपराधी कानून को चुनौती देंगे और पुलिस पर हमला करेंगे, उन्हें कानून के दायरे में रहकर उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा जो उन्हें समझ आती है।
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योगी जी ने कहा कोर्ट में विपक्ष द्वारा इसे गलत सवाल पूछना गलत है योगी जी ने अपनी व सरकार की नीतियों का बचाव किया ओर इसके फायदे बताए ओर कहा इससे जनता को बहुत फायदा होगा और कहा अगर कोई अपराधी जवान पर गोली चलता है तो ऐसे में जवान क्या हाथ पे हाथ रखे बैठे रहे
'ऑपरेशन लंगड़ा' पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
पिछले कुछ वर्षों में यूपी पुलिस ने 'ऑपरेशन लंगड़ा' के तहत हजारों अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इसमें अक्सर अपराधी के पैर में गोली लगती है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं, विशेषकर अखिलेश यादव का आरोप है कि ये मुठभेड़ें 'स्क्रिप्टेड' होती हैं। उनका कहना है कि पुलिस अपराधियों को पकड़ने के बाद उन्हें घुटने के बल बैठाकर गोली मारती है, ताकि इसे मुठभेड़ का रूप दिया जा सके।
ऑपरेशन लंगड़ा के तहत पिछले कुछ समय से हजारों अपराधों गिरफ्तार हुए है और उनके पैरों पर गोलियां चलाई गई है ऐसे में विपक्ष के नेता अखिलेश यादव ने कहा है कि पुलिस मुठभेड़ की कहानी रचती है और अपराधियों को पकड़ने के बाद उनके मार दिया जाता है
बनाम कार्यपालिका: संतुलन की चुनौती
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी एनकाउंटर के बाद उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि मुठभेड़ के तुरंत बाद संबंधित पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत करना गलत परंपरा है, जब तक कि जांच में यह साबित न हो जाए कि मुठभेड़ वास्तविक थी।
दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि इस नीति की वजह से ही आज यूपी में अपराधी या तो जेल में हैं या प्रदेश छोड़ चुके हैं, जिससे आम जनता और व्यापारियों के बीच सुरक्षा का भाव बढ़ा है।
निष्कर्ष
लोकतंत्र में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच का यह संवाद बेहद महत्वपूर्ण है। जहाँ एक तरफ अपराध मुक्त समाज के लिए पुलिस का मनोबल ऊंचा रहना जरूरी है, वहीं यह भी सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि कोई भी निर्दोष पुलिस की बर्बरता का शिकार न हो। योगी सरकार और हाईकोर्ट के बीच की यह बहस आने वाले समय में यूपी की कानून-व्यवस्था का नया स्वरूप तय करेगी।।
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