हरियाणा चुनाव 2026: क्या फिर होगा 'खेला'? क्रॉस वोटिंग के खौफ से कांप रही कांग्रेस, हिमाचल शिफ्ट हो सकते हैं विधायक!
चंडीगढ़:
हरियाणा राजनीति में हड़कम मच गया है एक बार फिर ' रिजॉर्ट पॉलिटिक्स ' की सुगबुगाहट तेज हो गई है आगे होने वाले चुनाव जो कि 16 मार्च को चुनाव होने वाले हैं राज्यसभा के चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी में गहरा डर बैठ गया ओर प्रदेश की दो राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले इस संग्राम में कांग्रेस पार्टी को डर है कि उसके विधायक कही एक बार फिर ' क्रॉस वोटिंग का शिकार न हो जाए
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इस डर के चलते पार्टी के अनुभवी रणनीतिकारों ने एक प्लान बि तैयार किया है आपको बता दे कि मतदान से पहले सभी विधायकों को किसी सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया है एक बार फिर पसंद के तौर पर हिमाचल प्रदेश का नाम आगे चल रहा ए
चुनावी समीकरण और डर की असली वजह
हरियाणा राज्य की दो राज्यसभा की सीटों के लिए चुनाव मैदान पूरी तरह सज चुका है कांग्रेस पार्टी ने जहां कर्मवीर बौद्ध को अपना प्रत्याशी चुनकर चुनावी अखाड़े में उतारा है वही दूसरी ओर भाजपा ने संजय भाटिया पर दावा खेला है लेकिन इस लड़ाई को ओर भी मजेदार बना रहे हैं निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल। आपको बता दे सतीश नांदल की मौजूदगी ने कांग्रेस पार्टी की रातों की नींद उड़ा दी है क्योंकि उन्हें बीजेपी का कथित समर्थन मिलने की चर्चा है और उनकी जीत पूरी तरह से क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं पर टिकी है
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आपको बता दे हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस के पास फिलहाल 37 विधायक है राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 31 वोटो की आवश्यकता होती हैं गणित के हिसाब से कांग्रेस प्रत्याशी कर्मवीर बौद्ध की जीत पक्की लग रही है लेकिन कांग्रेस का पिछला इतिहास उसे डरा रहा है पार्टी को डर है कि अगर कुछ विधायकों ने अपनी निष्ठा बदली, तो जीत का बना बनाया खेल बिगड़ सकता है
इतिहास से डरी कांग्रेस: जब हाथ से निकल गई थी बाजी
आपको बता दे हरियाणा कांग्रेस पार्टी के लिए राज्यसभा चुनाव कभी आसान नहीं रहे हैं ऐसे में पार्टी के विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग करने का एक पुराना इतिहास रहा है ये चुनाव बहुत बार कांग्रेस उम्मीदवारों को जीत के करीब ला कर हार का स्वाद चखाया है
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2022 का चुनाव:
कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता अजय माकन को हार का सामना करना पड़ा था क्योंकि कांग्रेस पार्टी के विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी उस समय भी कांग्रेस पार्टी के विधायकों को छत्तीसगढ़ भेजा था लेकिन रणनीति काम नहीं आई थी
2016 का 'इंक कांड':आपको बता दे यह घटना हरियाणा की राजनीति में पेंसिल स्कैम के नाम से मशहूर है अलग अलग स्याही के इस्तेमाल के कारण कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी आ कर आनंद के 12 वोट अमान्य अघोषित कर दिए गए ए
विधायकों की पहली पसंद बना हिमाचल प्रदेश
दोस्तों क्रॉस वोटिंग ओर भीतरघात के खतरों को देखते हुए कांग्रेस के थिंक टैंक ने आलाकमान को सलाह दी है कि वोटिंग के दिन तक विधायकों को किसी कांग्रेस शासित राज्य में भेज दिया जाए फिलहाल देश में हिमाचल प्रदेश कर्नाटक ओर तेलगाना में ही कांग्रेस की सरकार है।
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दोस्तो सूत्रों के हवाले से खबर मिली है पार्टी ने अपने विधायकों से उनकी पसंद पूछी है और ज्यादातर विधायकों ने हिमाचल जाने की इच्छा जताई है चूंकि हिमाचल हरियाणा के भौगोलिक रूप से काफी करीब हैं इसीलिए वहां जाना ओर समय पर वोटिंग के लिए चंडीगढ़ लौटाना आसान होगा हालांकि अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान ही लेगा
निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल: किंगमेकर या बाजीगर?
आपको बता सतीश नांदल की उम्मीदवार ने पूरे चुनावी समीकरण को त्रिकोणीय बना दिया है भले ही उनके पास अपने दम पर प्रयाप्त आंकड़े नहीं है लेकिन वह पूरी तरह से उन विधायकों के भरोसे है जो जो कि अपनी पार्टी से असंतुष्ट हैं अगर कांग्रेस या छोटे दलों के विधायक उनके पक्ष में वोट करते हैं तो वह पासा पलट सकते वो बीजेपी द्वारा उन्हें पर्दे के पीछे से मिल रहा समर्थन कांग्रेस पार्टी के लिए ये सबसे बड़ी चुनौती है
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निष्कर्ष: परीक्षा की घड़ी में कांग्रेस
हरियाणा राज्य में राज्यसभा चुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं है, बल्कि यह भूपेंद्र सिंह हुड्डा ओर कांग्रेस आलाकमान के लिए अपने एकजुटता दिखाने की अग्निपरीक्षा भी है क्या कांग्रेस सरकार अपने सभी 37 विधायकों को एक जुट रख पाएगी.. ये सवाल बना हुआ है या एक बार फिर हरियाणा की सियासत में कोई नया खेला होगा...?
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