बांग्लादेश: शपथ ग्रहण से पहले तारिक रहमान की पार्टी का भारत को कड़ा संदेश, कहा-

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Before the swearing-in ceremony, Tariq Rahman's party sent a strong message to India, saying:


ढाका/नई दिल्ली:

बांग्लादेश के आम चुनाव 2026 के नतीजों ने दक्षिण एशिया की बिसात बदल दी है। बेगम खालिदा जिया की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है और अब देश की कमान तारिक रहमान के हाथों में जाने वाली है। लेकिन प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से पहले ही BNP ने भारत के साथ भविष्य के संबंधों को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने नई दिल्ली के कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

ओर सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है हाल ही में बांग्लादेश में चुनाव हुए थे जिसमें bnp ने चुनाव जीता ओर तारीक रहमान के हाथों में प्रधानमंत्री की कुर्सी गई थी जिसको लेकर प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी ने भी तारिक रहमान को प्रधानमंत्री बनने की बधाई दी थी उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से उनको बधाई दी थी लेकिन हाल ही में उन्होंने एक बयान दिया था जो आज कल सोशल मीडिया काफी वायरल हो रहा है जिसको ले कर अलग अलग अटकलें लगाई जा रही है 


शेख हसीना की वापसी पर 'आर-पार' के मूड में BNP

BNP के शीर्ष नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि भारत के साथ बेहतर रिश्तों की बुनियाद इस बात पर टिकी होगी कि भारत शेख हसीना के मामले में क्या रुख अपनाता है। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि शेख हसीना पर बांग्लादेश की अदालतों में मानवता के खिलाफ अपराधों के गंभीर मामले चल रहे हैं।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा— "भारत हमारा पड़ोसी है और हम अच्छे संबंध चाहते हैं, लेकिन शेख हसीना को कानून का सामना करने के लिए बांग्लादेश वापस भेजना ही होगा। उन्हें शरण देना बांग्लादेश की जनता की भावनाओं के खिलाफ है।"


BNP के एक प्रेंस कॉन्फ्रेंस काफी चर्चा में है तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनने के बाद जब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछा गया कि आप भारत ओर बांग्लादेश के के रिश्तों को किस तरह देखते है जिसके जवाब में कहा कि भारत के साथ रिश्तों की बुनियाद इसी बात पर टिकी है कि वो शेख हसीना के मामले में क्या रुख अपनाता है उन्होंने कहा शेख हसीना पर काफी गंभीर आरोप लगे हैं 

उन्होंने साफ कहा 👉 कि भारत हमारा पड़ोसी देश है और हम उनके साथ अच्छे रिश्ते रखना चाहते हैं लेकिन शेख हसीना को कानून का सामना करने के लिए बांग्लादेश भेजना होगा उन्हें शरण देना जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना है 

शपथ से पहले 'भारत' को लेकर नई नीति

12 फरवरी को आए चुनावी नतीजों के बाद यह स्पष्ट था कि BNP की सरकार भारत के साथ संबंधों को 'रीसेट' (Reset) करेगी। तारिक रहमान की पार्टी का मानना है कि पिछले 15 सालों में भारत ने केवल एक पार्टी (अवामी लीग) का साथ दिया, जिससे बांग्लादेश की जनता में नाराजगी बढ़ी।

बांग्लादेश की जनता काफी निराश थी क्योंकि वहां की जनता का मानना था कि भारत ने पिछले 15 सालों से केवल एक ही पार्टी का साथ दिया है 12 फरवरी के चुनाव के बाद जब bnp की सरकार बनी तभी से भारत ओर बांग्लादेश के संबंधों को लेकर अलग अलग अटकलें लगाई जा रही थी

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बराबरी का रिश्ता: 

BNP ने अपने बयान में कहा कि अब रिश्ते 'मालिक और नौकर' के नहीं, बल्कि 'दो संप्रभु देशों' के बीच होंगे।

सुरक्षा और सीमा: पार्टी ने वादा किया है कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होने देंगे, लेकिन बदले में वे भारत से तीस्ता जल संधि और सीमा पर होने वाली मौतों पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

दिल्ली के लिए 'इधर कुआँ, उधर खाई' वाली स्थिति

भारत के लिए यह स्थिति बेहद नाजुक है। एक तरफ शेख हसीना भारत की सबसे भरोसेमंद सहयोगी रही हैं और उन्हें वापस भेजने का मतलब होगा एक पुराने मित्र का साथ छोड़ना। दूसरी तरफ, अगर भारत प्रत्यर्पण की मांग ठुकराता है, तो बांग्लादेश की नई सरकार के साथ रिश्तों की शुरुआत कड़वाहट के साथ होगी, जिसका फायदा चीन और पाकिस्तान उठाने की कोशिश कर सकते हैं।

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भारत के लिए स्थिति काफी अलग है अगर शेख हसीना का साथ छोड़ दिया तो पुराना मित्र गंवा देंगे अगर शेख हसीना का साथ दिया तो भारत ओर बांग्लादेश में जो नई सरकार बनी है उसके साथ भारत के रिश्ते खराब हो जाएंगे जिससे इसका फायदा भारत के दुश्मन देख पाकिस्तान ओर चीन उठाएंगे इसलिए भारत क्या करेगा कुछ समझ नहीं आ रहा है भारत के लिए सइधर कुआं उधर खाई वाली बात हो गई है 

बांग्लादेश में 'हसीना युग' का अंत और नई चुनौतियां

बांग्लादेश के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BNP की जीत केवल एक सत्ता परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह एक नई विचारधारा की शुरुआत है। तारिक रहमान, जो खुद लंबे समय से लंदन में निर्वासन में थे, अब एक बदले हुए नेता के रूप में उभरना चाहते हैं। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को संयम बरतने और अल्पसंख्यकों (विशेषकर हिंदुओं) की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी छवि 'कट्टरपंथी' न बने।

निष्कर्ष

शपथ ग्रहण समारोह से पहले आया यह बयान भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए एक 'लिटमस टेस्ट' की तरह है। क्या भारत प्रत्यर्पण की संधि के तहत शेख हसीना को वापस भेजेगा? या फिर कूटनीति का कोई नया रास्ता निकाला जाएगा? आने वाले कुछ हफ्ते दोनों देशों के इतिहास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

ओर दोनों के लिए काफी रोचक है अभी देखने वाली बात ये है कि अभी भारत क्या करेगा किसका साथ देगा किसका नहीं देगा अभी देखते हैं क्या भारत शेख हसीना को बांग्लादेश वापस भेजता है या कोई ओर रास्ता निकलता है 




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