संसद में बड़ा उलटफेर: पीएम मोदी के भाषण के बिना ही पास हुआ राष्ट्रपति के अभिभाषण पर 'धन्यवाद प्रस्ताव', आखिर क्यों हुआ ऐसा?
संसद में बड़ा उलटफेर: पीएम मोदी के भाषण के बिना ही पास हुआ राष्ट्रपति के अभिभाषण पर 'धन्यवाद प्रस्ताव', आखिर क्यों हुआ ऐसा?
भारतीय संसदीय इतिहास में एक बेहद असाधारण घटनाक्रम सामने आया है। संसद के बजट सत्र के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए 'धन्यवाद प्रस्ताव' (Motion of Thanks) को बिना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब या भाषण के ही सदन में पारित कर दिया गया। आमतौर पर यह परंपरा रही है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के बाद प्रधानमंत्री खुद उसका जवाब देते हैं, लेकिन इस बार की स्थिति कुछ अलग रही।
ओर बिना भाषण के ही प्रस्ताव मंजूर कर दिया ऐसे में सवाल उठ रहा है प्रधानमंत्री ने भाषण क्यों नहीं दिया क्या हुआ अचानक संसद के बजट सत्र के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव को बिना प्रधानमंत्री के जवाब के ही सदन में पारित किया जो आमतौर पर यह परंपरा रही हैं
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क्या है पूरा मामला?
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के लिए संसद का समय निर्धारित था। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। लेकिन, सदन में जारी भारी हंगामे और विपक्ष के कड़े विरोध के बीच स्थिति ऐसी बनी कि प्रधानमंत्री का भाषण नहीं हो सका। विपक्षी दल विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर अड़े हुए थे, जिसके चलते सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही थी। आखिरकार, शोर-शराबे के बीच ही प्रस्ताव को ध्वनि मत (Voice Vote) से पारित कर दिया गया। सदन में जारी भारी हंगामे ओर विपक्ष के कड़े विरोध के बीच स्थिति ऐसी बनी है कि प्रधानमंत्री भाषण नहीं हो पाया ओर विपक्ष अपनी मांगो को ले कर अपनी अपनी जिद्द पर अड़े रहें इसी कारण सदन की कार्यवाही बाधित होती रही
विपक्ष का कड़ा रुख और संसद में हंगामा
कांग्रेस समेत इंडिया (INDIA) गठबंधन के अन्य दलों ने सरकार पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना था कि वे ज्वलंत मुद्दों पर प्रधानमंत्री से सीधे जवाब चाहते थे, लेकिन सरकार ने शोर-शराबे का फायदा उठाकर बिना चर्चा पूरा किए ही प्रस्ताव पास करा लिया। विपक्षी नेताओं ने इसे 'संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन' करार दिया है। वहीं, सरकार का कहना है कि विपक्ष चर्चा चाहता ही नहीं था और केवल सदन की कार्यवाही में बाधा डालना ही उनका एकमात्र मकसद था।
क्यों जरूरी होता है प्रधानमंत्री का भाषण?
संसदीय लोकतंत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री का भाषण सरकार के भविष्य का रोडमैप होता है। इसमें प्रधानमंत्री पिछले साल की उपलब्धियों और आने वाले समय की योजनाओं का ब्यौरा देते हैं। साथ ही, विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब भी इसी भाषण के दौरान दिए जाते हैं। प्रधानमंत्री के भाषण के बिना प्रस्ताव का पास होना यह संकेत देता है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़वाहट अपने चरम पर पहुँच गई है।
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संसदीय प्रणाली में प्रधानमंत्री का भाषण होता है राष्ट्रपति के भाषण के जवाब में ये सरकार के मार्ग या रोड़मैप को दर्शाता है प्रधानमंत्री इस भाषण में पिछली साल की उपलब्धियों ओर आगे का ब्यौरा देता है साथ ही विपक्ष के सवालों का जवाब देता है
सत्ता पक्ष की दलील: "हमने सभी को मौका दिया"
संसदीय कार्य मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार थी। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने राष्ट्रपति के सम्मान में दिए जाने वाले इस प्रस्ताव पर भी राजनीति की। सरकार का तर्क है कि सदन का समय कीमती है और चूंकि चर्चा पूरी हो चुकी थी, इसलिए प्रस्ताव को पास करना संवैधानिक रूप से सही कदम था।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया कि सरकार के मुद्दों के बारे में चर्चा किया उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने राष्ट्रपति के सम्मान में जवाब दिया
ऐतिहासिक संदर्भ और भविष्य की राजनीति
यह पहली बार नहीं है जब संसद में हंगामा हुआ हो, लेकिन बिना पीएम के समापन भाषण के धन्यवाद प्रस्ताव का पास होना कम ही देखा जाता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटना के बाद आगामी सत्रों में भी टकराव बढ़ने के आसार हैं। इसका असर आने वाले चुनावों और सरकार की विधायी योजनाओं पर भी पड़ सकता है।
पहली बार नहीं हुआ जब संसद में हंगामा हुआ हो बहुत बार हंगामा हुआ लिकिन बिना प्रधानमंत्री के भाषण के कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ है
निष्कर्ष
संसद जनता की आवाज उठाने का मंच है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा लोकतंत्र की एक स्वस्थ परंपरा है। बिना प्रधानमंत्री के जवाब के इस प्रस्ताव का पारित होना कहीं न कहीं सदन के भीतर संवाद की कमी को दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच यह गतिरोध कैसे खत्म होता है।
"भारतीय संसद में आज कुछ ऐसा हुआ जिसने सबको हैरान कर दिया। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को बिना प्रधानमंत्री के भाषण के ही पास कर दिया गया। क्या यह विपक्ष की रणनीति थी या सरकार की जल्दबाजी? इस बड़ी राजनीतिक उठापटक का विश्लेषण पढ़ें हमारी वेबसाइट पर।"
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