भावुक हुए पीएम मोदी: बोले- "वो मेरी कब्र खोदना चाहते हैं, पर जनता मेरा सुरक्षा कवच है", जानें पूरा मामला
भावुक हुए पीएम मोदी: बोले- "वो मेरी कब्र खोदना चाहते हैं, पर जनता मेरा सुरक्षा कवच है", जानें पूरा मामला
भारतीय राजनीति में एक बार फिर गर्माहट पैदा हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए एक अत्यंत भावुक भाषण दिया। इस दौरान पीएम मोदी ने न केवल अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं, बल्कि विपक्ष के तीखे हमलों का जवाब देते हुए खुद पर हो रहे निजी हमलों पर भी अपनी पीड़ा व्यक्त की
राज्यसभा में भाषण देते हुए कहा इस दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सरकार की उपलब्धियां गिनाई साथ में विपक्ष पर तीखा वार किया ओर अपने निजी जीवन पर विपक्ष के हमलों का करारा जवाब दिया
"मेरी कब्र खोदने की ख्वाहिश" - पीएम का विपक्ष पर प्रहार
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के दौरान विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि नफरत इस कदर बढ़ गई है कि विपक्षी नेता खुलेआम "मोदी की कब्र खुदेगी" जैसे नारे लगा रहे हैं। पीएम ने भावुक स्वर में कहा, "देश देख रहा है कि कुछ लोग किस तरह की राजनीति पर उतर आए हैं। वे मेरी कब्र खोदने का सपना देख रहे हैं, लेकिन उन्हें शायद यह नहीं पता कि देश की करोड़ों जनता का आशीर्वाद मेरा सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।"
ओर कहा जनता मुझे पर जो 2014 से विश्वास करती आई है वो जनता का अनमोल प्यार है उनका कोई कुछ बाल तक बाका नहीं कर सकता उन्होंने कहा विपक्ष उनकी कब्र खोदने की खवाइश रखते हैं परन्तु जनता का प्यार उनको कुछ नहीं होने देता है प्रधानमंत्री ने भावुक होते हुए कहा जनता सब देख रही हैं
सदन में दिखा अलग अंदाज
आमतौर पर कड़े तेवरों के लिए जाने जाने वाले प्रधानमंत्री मोदी इस बार थोड़े अलग अंदाज़ में नज़र आए। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करना विपक्ष की हताशा को दर्शाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जितना कीचड़ उछाला जाएगा, कमल उतना ही ज्यादा खिलेगा। उनके इस बयान के बाद सदन में काफी देर तक 'मोदी-मोदी' के नारे भी गूंजते रहे।
प्रधानमंत्री का आज अलग रूप दिखने को मिला आज वो विपक्ष पर तीखा हमला किया था और जो विपक्ष ने उनके निजी जीवन पर जो अपशब्द बोला वो सुनकर वो काफी उत्साहित किया था वो निराश दिखा मोदी पर हमले किया जिसके जवाब बहुत खतरनाक है
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विकास बनाम विवाद: सरकार का पक्ष
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में अपनी सरकार द्वारा किए गए जनकल्याणकारी कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य 'विकसित भारत' का निर्माण करना है, जबकि विपक्ष का एकमात्र एजेंडा उन्हें रोकना और बदनाम करना है। उन्होंने डिजिटल इंडिया, उज्ज्वला योजना और देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था का ज़िक्र करते हुए कहा कि जनता काम देखती है, गालियां नहीं। विपक्ष के जवाब दिया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जो देश में विकास हुआ है उनका ब्यौरा दिया ओर जो विवाद चल रहा है
विपक्ष की प्रतिक्रिया और हंगामा
पीएम मोदी के इस भावुक और आक्रामक भाषण के दौरान विपक्ष ने सदन में भारी हंगामा किया। विपक्षी सांसदों का कहना था कि प्रधानमंत्री मुख्य मुद्दों जैसे बेरोजगारी और महंगाई से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की बातें कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी इस तरह के नारों का समर्थन नहीं किया है और सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए इमोशनल कार्ड खेल रही है।
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निष्कर्ष: लोकतंत्र के लिए क्या हैं इसके मायने?
संसद के भीतर इस तरह की तीखी बहस और व्यक्तिगत टिप्पणियां लोकतंत्र के स्तर पर सवाल खड़े करती हैं। पीएम मोदी का यह भाषण सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस भाषण का असर आने वाले विधानसभा चुनावों और देश के राजनीतिक माहौल पर गहरा पड़ेगा। क्या विपक्ष की यह रणनीति उल्टी पड़ेगी या जनता पीएम की इस भावुक अपील से जुड़ेगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।


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