NCERT विवाद: क्या धर्मेंद्र प्रधान पर गिरेगी गाज या अधिकारियों की होगी छुट्टी? सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद गरमाई सियासत
नई दिल्ली/जमशेदपुर:
भारत की शिक्षा व्यवस्था की धुरी माने जाने वाले NCERT (नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) की किताबों को लेकर एक बार फिर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। इस बार मामला इतना गंभीर है कि खुद सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए किताब पर 'मुकम्मल बैन' लगा दिया है। विवाद की जड़ कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान (Social Science) की नई किताब का वह अध्याय है, जिसमें भारतीय न्यायपालिका में 'भ्रष्टाचार' का जिक्र किया गया है।
उसको सरकार ने बैन करने का फैसला किया गया है क्योंकि उस किताब में भारत की शान न्यायपालिका को भ्रष्ट बताया था जिसके बाद विवाद हो गया सोशल मीडिया पर भी उसको लेकर हल चल तेज हो गई जिसके बाद मजबूरन किताब को बैन कर दिया आपको बता दे भारत की शिक्षा व्यवस्था की शान मानी जाती हैं NCERT की बुक ऐसे में उनमें इस तरह विवाद होना सोचने वाली बात है ये विषय गंभीर है इसमें सुप्रीम कोर्ट ने खुद हस्तक्षेप किया था
इस घटनाक्रम ने न केवल सरकार की किरकिरी कराई है, बल्कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के सामने भी बड़ी चुनौतियां पेश कर दी हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस चूक के लिए बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या खुद मंत्री को जवाबदेह ठहराया जाएगा?
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| न्यायपालिका को बताया भ्रष्ट google photo |
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क्योंकि NCERT शिक्षा व्यवस्था की शान होता है उसके खिलाफ इसी खबर निकलकर सामने आना सोचने वाली बात हैं इस पूरे वाक्य में सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की पोल खोल दी है
क्या है पूरा विवाद? (The Core Issue)
विवाद का केंद्र कक्षा 8 की पुस्तक का अध्याय 4 है, जिसका शीर्षक है - "हमारे समाज में न्यायपालिका
की भूमिका" (The Role of the Judiciary in Our Society)। इस अध्याय के एक उप-भाग में न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार, जजों के खिलाफ लंबित शिकायतों और पारदर्शिता की कमी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की गई थी।
दोस्तों आपको बता दे NCERT में 8 th कक्षा में जो 4 अध्याय था... उसमें एक शीर्षक था उसमें दिक्कत बताई जा रही है जिसको लेकर ये विवाद हुआ था उसमें न्यायपालिका के ऊपर सवाल उठाए ए उसमें न्यायपालिका को भ्रष्ट बताया था जिसके बाद ये मुद्दा ओर भी गंभीर हो गया था क्योंकि ये एक बहुत ही संवेदनशील विषय है छोटे बच्चों की मानसिक बदलना होता है
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस पर सख्त आपत्ति जताते हुए इसे "न्यायपालिका की गरिमा को कम करने वाली साजिश" करार दिया। कोर्ट का मानना है कि 13-14 साल के बच्चों को न्यायपालिका के प्रति अविश्वास सिखाना देश के संवैधानिक ढांचे के लिए खतरनाक है।
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| NCERT Book Google photo |
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ओर कहा ऐसा करना बहुत गलत है 13 से 14 साल के बच्चों के मन में न्यायपालिक को भ्रष्ट बताना फिर बच्चों प्रकार मानसिक स्थिति कुछ इस प्रकार हो जाती है कि वह फिर न्यायपालिका को भ्रष्ठी समझते हैं मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में इस पर सख्त आपत्ति जताते हुए निर्णय लिया गया कठोर क्योंकि यह न्यायपालिका की गरिमा को कम करने की साजिश है
धर्मेंद्र प्रधान का बयान: 'गलती हुई है, कार्रवाई होगी'
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सार्वजनिक रूप से खेद जताया है। जमशेदपुर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने साफ कहा कि:
सरकार और शिक्षा मंत्रालय का न्यायपालिका का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था।
जैसे ही मामला संज्ञान में आया, NCERT को तत्काल प्रभाव से सभी किताबों को वापस लेने (Recall) का आदेश दिया गया।
एक में इंटरव्यू देते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह हमारी गलती हम गलती और किताबों को वापस लेने का आदेश देते हैं हमारा मकसद न्यायपालिका अपमान करने का नहीं था
इस पूरे मामले की उच्च-स्तरीय जांच कराई जाएगी और जवाबदेही तय की जाएगी।
लैक ऑफ रिव्यू प्रोसेस:
यह सामने आया है कि इस विवादास्पद अध्याय को लिखने वाली कमेटी में कोई भी कानूनी विशेषज्ञ (Legal Fraternity) शामिल नहीं था। बिना किसी कानूनी समीक्षा के इतने संवेदनशील मुद्दे को पाठ्यक्रम में शामिल करना एक बड़ी प्रशासनिक विफलता है।
पीएम मोदी की नाराजगी:
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटनाक्रम पर नाराजगी जाहिर की है और शिक्षा मंत्रालय को जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।
दोस्तों इस पूरे मामले पर विवाद बना हुआ है और सभी इसकी आलोचना कर रहे हैं सभी कह रहे हैं कि बिना किसी कानूनी समीक्षा के बाद बड़ी कर्रवाई करना पड़ेगा दोस्तों आपको बता दे जब इसके बारे में पीएम नरेंद्र मोदी
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तो सूत्रों से खबर निकलकर सामने आ रही है कि वह भी खासा नाराज है इसके बारे में और कानूनी करने के बारे बोल रहे हैं
क्या अधिकारियों पर गिरेगी गाज?
सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा सचिव और NCERT के निदेशक को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को सस्पेंड किया जा सकता है। धर्मेंद्र प्रधान ने भी संकेत दिए हैं कि जिन्होंने इस अध्याय का मसौदा तैयार किया और जिन्होंने इसे बिना जांचे पास किया, उन पर सख्त कानूनी या विभागीय कार्रवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के इतने कठोर होने के बाद आशंका जताई जा रही है कि बड़े अधिकारियों पर इसकी गाज पड़ सकती हैं क्योंकि ये कोई छोटा मुद्दा नहीं है बच्चों के भविष्य के साथ खेला जा रहा है कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया जा रहा है कानून की इतनी बड़ी सौगात को भ्रष्ट बताया जा रहा है क्योंकि बच्चे इतने छोटे होते हैं कि उनको जो बताया जाए वही सत्य मान लेते है ऐसे में उनको इतना बड़ा गलत बताया जा रहा है
भविष्य में क्या बदलाव होंगे?
NCERT ने अब फैसला लिया है कि इस अध्याय को पूरी तरह से हटाकर, कानूनी विशेषज्ञों की सलाह से दोबारा लिखा जाएगा। साथ ही, भविष्य में पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा के लिए 'टियर-3' चेकिंग सिस्टम लागू करने की बात कही जा रही है ताकि ऐसी संवैधानिक चूक दोबारा न हो।
निष्कर्ष
शिक्षा और न्यायपालिका किसी भी लोकतंत्र के दो सबसे मजबूत स्तंभ हैं। NCERT जैसी प्रतिष्ठित संस्था से इस तरह की चूक होना यह दर्शाता है कि पाठ्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया में कहीं न कहीं बड़ी दरार है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा मंत्रालय इस दाग को धोने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
क्योंकि दोस्तो शिक्षा ओर न्याय दोनों ही एक देश को चलाने के लिए अहम हो जाते हैं ऐसे में ऐसा सवाल उठाना गलत है वो भी न्याय की मूर्ति कही जाने वाली संस्था पर हम ओर हमारी टीम इसका विरोध करते हैं और इस पर सख्त फैसले का समर्थन करते हैं और दोषियों को सजा दी जाए..
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